Thursday, August 29, 2019

За «Спартак» в Европе страшно: без Тиля это совсем другая команда

Сегодня «Спартак» проведет главный матч лета, а может быть и всей первой половины сезона. В Москве красно-белые примут португальскую «Брагу», которой в первом матче проиграли на выезде со счетом 0:1.

Для народной команды на кону проход в Лигу Европы, где есть реальный шанс побороться за попадание в плей-офф и дальнейшее продвижение в турнире. Деньги не ахти какие, но в данной ситуации для Леонида Федуна любая копейка на счету, не говоря уже о важности позитивного результата для тренерского штаба.

Многое в этой игре решается и для России. Если «Спартак» проходит «Брагу», у нас в еврокубках остается пять клубов, которые будут приносить очки в копилку страны. Если «Спартак» не проходит «Брагу», мы теряем одну команду, а наш главный соперник в борьбе за шестую строчку в рейтинге УЕФА – приобретает. В этом случае мы почти наверняка к концу сезона уступим португальцам шестое место, потеряем одну команду в Лиге чемпионов на сезон 2021/22 и место в первой корзине при жеребьевке группового этапа, на которое надо молится.

Во-первых, по подбору футболистов «Спартак» и «Брага» - практически идентичны. Общая стоимость игркоков красно-белой команды составляет 93,55 млн евро. У португальцев этот показатель равен 93,25 млн евро. «Брага» - ближайшая к «Спартаку» команда в Европе по этому критерию. Раз уж мы принялись мерять качество игроков деньгами, то надо признать, что российский клуб не превосходит соперника. В среднем каждый футболист «Спартака» стоит 3,74 млн евро, «Браги» - 3,33.

Во-вторых, в составе «Спартака» в этом матче будет отсутствовать важнейшее звено – молодой голландский полузащитник Гус Тиль. Он не имеет права играть за красно-белых в квалификации Лиги Европы, так как уже был заигран на этом этапе за свой предыдущий клуб – АЗ. Без голландца в чемпионате России у «Спартака» есть стартовая, натужная и нечестная победа над дебютантом – «Сочи», а также серия из трех матчей без побед с поражением от другого дебютанта – «Тамбова». С Тилем в составе у «Спартака» три победы подряд: две выездные и одно домашнее дерби. Кстати, не будет играть еще и Джордан Ларссон.

В-третьих, «Спартак» умудрился проиграть с очень неприятным счетом 0:1. Любой гол «Браги» в Москве будет означать, что красно-белые должны будут забивать сопернику три, чтобы пройти дальше.

Первый момент – Андре Шюррле. Чемпион мира из Германии уже стал настоящим лидером клуба и готов вести молодую гвардию за собой в бой. «Спартак» уже одерживает волевые победы, чего мы практически не видели в прошлом сезоне, когда команда скорее проигрывала ведя в счете, чем переламывала ход поединка. Во многом на это повлияли именно лидерские качества Шюррле.

Второй момент – победная линия. Из последних шести матчей «Спартак» выиграл пять, уступив лишь «Браге» в Португалии. «Спартак» - команда настроения и такие моменты для нее важны. Отлично, что после поражения случилась победа в Самаре, которая вернула игрокам веру в себя.

В общем, нас ждет очень интересный матч. За «Спартак» должна болеть вся Россия, потому что эта битва не только за место красно-белых в группе Лиги Европы, но и за место нашей страны в европейском футболе.

Friday, November 23, 2018

गुरु नानक देव जी 24 साल में 28 हजार किमी पैदल चले, एक साल में औसतन 1167 किमी

श्री गुरु नानक देव जी ने 24 साल में दो उपमहाद्वीपों के 60 प्रमुख शहरों की पैदल यात्रा की। इस दौरान उन्होंने 28 हजार किमी का सफर किया। उनकी यात्राओं का मकसद समाज में मौजूद ऊंच-नीच, जात-पांत, अंधविश्वास आदि को खत्म कर आपसी सद्भाव, समानता कायम करना था। वे जहां भी गए, एक परमात्मा की बात की और सभी को उसी की संतान बताया। उनकी यह यात्राएं आज भी कई मसलों को हल करने का रास्ता बन सकती हैं। खास बात ये है कि गुरुजी इन यात्राओं के दौरान रास्ते में पड़ने वाली हर रियासत के राजा या बादशाह से मिले और उन्हें ये बातें समझाईं।

पहली यात्रा- गुरु जी अपनी पहली यात्रा के दौरान पंजाब से हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, नेपाल, सिक्किम, भूटान, ढाका, असम, नागालैंड, त्रिपुरा, चटगांव से होते हुए बर्मा (म्यांमार) पहुंचे थे। वहां से वे ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और हरियाणा होते हुए वापस आए थे।
 दूसरी यात्रा- दूसरी यात्रा में गुरु जी पश्चिमी पंजाब (पाकिस्तान), सिंध, समुद्री तट के इलाके घूमते हुए गुजरात, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु के तटीय इलाकों से होते हुए श्री लंका पहुंचे और फिर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा होते हुए वापस आए।
 तीसरी यात्रा- तीसरी यात्रा में गुरु जी हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तिब्बत (सुमेर पर्वत का इलाका) होते हुए लेह-लद्दाख, कश्मीर, अफगानिस्तान (काबुल), पश्चिमी पंजाब होते हुए वापस आए थे।
चौथी यात्रा- गुरु नानक देव जी अपनी चौथी यात्रा में मुल्तान, सिंध, बलोचिस्तान, जैदा, मक्का पहुंचे और मदीना, बगदाद, खुरमाबाद, ईरान (यहां उनके साथी भाई मरदाना का निधन हो गया था), इसफाहान, काबुल, पश्चिमी पंजाब से होते हुए करतारपुर साहिब वापस लौटे थे।
पांचवीं यात्रा- इस यात्रा की पुष्टि नहीं है, लेकिन डॉ. कुलदीप सिंह ढिल्लों के शोध के मुताबिक, 5वीं यात्रा में गुरु जी ने 2334 किलोमीटर का सफर किया था।

आज के संदर्भ में यात्राओं का महत्व
गुरु जी ने अपनी यात्राओं के जरिये समाज और मानवता को एक सूत्र में पिरोने की कोशिश की। ये आज भी प्रासंगिक हैं क्योंकि यात्रा वाले इलाके आज भी तरह-तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। इनमें आतंकवाद प्रमुख है। विद्वानों की मानें तो इन रूटों से हम साउथ एशिया, सेंट्रल एशिया और अरब मुल्कों से आसानी से जुड़ सकते हैं। इनके जरिये अगर ट्रेड और सरहदी बंदिशों में ढील देकर आवाजाही को सुगम बनाया जाए तो समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है।

3 कहानियां- धर्म की कमाई से निकली दूध की धारा, पाप की कमाई से खून की धारा

1. गुरु जी पहली यात्रा पर निकले थे। वे भाई मरदाना के साथ सैदपुर नगर पहुंचे और वहां मेहनतकश बढ़ई भाई लालो के यहां ठहरे। शूद्र अर्थात नीची जाति के भाई लालो ने सेवा भाव से जो रूखा-सूखा दिया गुरु साहिब ने उसे स्वीकार किया। हालांकि, उस दौर में नीची जाति के यहां ऊंची जाति वालों का खाना-पीना अच्छा नहीं समझा जाता था। खैर, भाई मरदाना ने गुरु जी से सवाल किया कि इस रूखे-सूखे भोजन में भी स्वादिष्ट खाने जैसा आनंद कैसे है? गुरु जी ने कहा कि इस इंसान के दिल में प्रेम है, यह कड़ी मेहनत करके कमाई करता है। इसमें परमात्मा की बरकत पड़ी हुई है।

2. उसी समय सैदपुर नगर के जागीरदार मलिक भागो ने ब्रह्म भोज रखा था। उसने दूसरे साधु-संतों के साथ गुरु जी को भी निमंत्रण भेजा। भोज के लिए जो सामग्री इकट्ठा की गई थी, वह किसानों के घरों से जबरन लाई गई थी। सब पहुंचे, लेकिन गुरु जी नहीं आए। भागो ने गुरु जी से भोज में न आने का कारण पूछा। गुरु जी ने उत्तर देने की बजाय भाई लालो के घर का रूखा-सूखा और घर का पूड़ी-हलवा मंगवाया। एक मुट्ठी से लालो जी के रूखे-सूखे खाने को निचोड़ा तो उससे दूध की धारा बह निकली। दूसरी मुट्ठी से जब मलिक भागो के व्यंजन को निचोड़ा तो उसमें से खून की धारा निकली। गुरु जी ने वहीं कहा, "यह है धर्म की कमाई की दूध की धारा और यह है पाप की कमाई की खून की धारा।" यह देख मलिक भागो गुरु जी के चरणों में गिर पड़ा और अपने किए पापों व लूटपाट का प्रायश्चित कर धर्म की कमाई करने लगा।

3.  एक गांव से गुजरते हुए कुएं के लालची मालिक ने गुरु जी को पैसे दिए बिना पानी देने से मना कर दिया। गुरु जी हाथ से मिट्‌टी खोदने लगे। कुछ ही देर में साफ पानी आने लगा। गांव वाले भी पानी पीने वहां पहुंच गए। कुएं के मालिक ने देखा एक तरफ धारा बह रही थी, दूसरी तरफ उसके कुएं का पानी कम हो रहा था। गुस्से में आकर उसने गुरु जी की ओर पत्थर मारा। गुरु जी ने हाथ आगे किया और पत्थर वहीं रुक गया। ये देख कुएं का मालिक उनके चरणों पर गिर पड़ा। गुरु जी ने समझाया, ‘किस बात का घमंड? खाली हाथ आए थे, खाली हाथ जाओगे। अच्छा करोगे तो लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहोगे।’

Monday, November 5, 2018

संतों की मांग जायज, लेकिन भाजपा में राम मंदिर पर अभी कोई चर्चा नहीं

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर एक तरफ जहां साधु-संतों के सब्र का बांध टूट रहा है और उन्होंने मोदी सरकार को तुरंत इस मसले पर अध्यादेश लाने तक का अल्टीमेटम दे दिया है, वहीं भारतीय जनता पार्टी के भीतर राम मंदिर पर अभी तक कोई चर्चा ही नहीं हुई है.

रविवार को दिल्ली में धर्मादेश कार्यक्रम के समापन के मौके पर देशभर से आए साधु-संतों ने राम मंदिर निर्माण के लिए प्रस्ताव पास किया, जिसमें कहा गया कि अब राम मंदिर के निर्माण को लेकर किसी प्रकार का न तो समझौता होगा और न ही कोई बातचीत होगी, बल्कि इसके लिए सरकार जल्द से जल्द अध्यादेश लेकर आए या फिर कानून बनाए. संतों के इस निर्णय के बाद सत्ताधारी बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने आजतक से कहा कि राम मंदिर का मामला पिछले आठ साल से सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए देश की जनता चाहती है इस मसले पर कानून बनाया जाए.

'पार्टी में राम मंदिर पर चर्चा नहीं'

संतों के फैसले पर जब शाहनवाज हुसैन से सवाल किया गया तो उन्होंने राम मंदिर निर्माण की मांग को संतों का अधिकार बताया. साथ ही संतों की कानून बनाने की मांग पर उन्होंने कहा कि तथ्यों को देखने के बाद सरकार को फैसला करना है कि कानून बनाना है या नहीं. हालांकि, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता होने के नाते ये बताया कि मैं पार्टी का अधिकृत प्रवक्ता हूं और राम मंदिर के निर्माण को लेकर पार्टी में अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई है.

शाहनवाज हुसैन ने ये भी कहा कि राम मंदिर केस देश का सबसे पुराना मामला है और सिर्फ आरएसएस या वीएचपी ही नहीं, बल्कि देश की बहुत बड़ी आबादी चाहती है कि इस मसले पर जल्द फैसला आए.

संतों की सभा में क्या फैसला हुआ

धर्मादेश का दो दिवसीय कार्यक्रम रविवार को खत्म हुआ, जिसमें अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेन्द्र नंद सरस्वती ने राम मंदिर निर्माण की बात पर कहा कि यह कोई आग्रह नहीं बल्कि आदेश है. उन्होंने कहा कि कानून लाया जाए और चुनाव से पहले राम मंदिर के निर्माण का काम पूरा हो. अगर यह नहीं किया गया तो हमें हमारा रास्ता पता है. संतों ने कहा कि इतिहास में पहले भी बहुत कुछ हो चुका है, अब मंदिर निर्माण होकर रहेगा.

बता दें कि शाहनवाज हुसैन का यह बयान ऐसे माहौल में आया है जब बीजेपी से जुड़े कई बड़े नेता, यहां तक कि मोदी सरकार में मंत्री तक तुरंत राम मंदिर निर्माण की पुरजोर तरीके से मांग कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने पर भी सवाल उठा रहे हैं.